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दो सहेलियों की दोस्ती हिंदी में | Friendship of two friends in hindi

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Friendship of two friends in hindi

 

दो सहेलियों की दोस्ती सबसे अच्छी कहानी

दो सहेलियों की दोस्ती का रिश्ता बहुत ही प्यारा रिश्ता होता है! लेकिन इसको हर कोई नहीं समझता सिर्फ वही समझ सकता है। जो इस रिश्ते को  निभाना बड़ी अच्छी तरह से जानता है। हमारे जीवन में ऐसे बहुत सारे कारन होते हैं, जिनके कारन यह रिश्ता टूट जाता है! कई बार तो ऐसा होता है कि पैसा भी दोस्ती के रिश्ते को दूर कर देता  है, मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ।

आज मैं आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जा रही हूं, जिसके कारन मैं आज पूरी तरह से टूट चुकी हूं मेरी एक सहेली का नाम सुमन है। वह अब कपड़े की दुकान कर रही है। जो दुकान अब उसके पास है वह पहले मेरे पास थी।

मैंने भी एक साल पहले कपड़े की दुकान की थी बड़े शौक से, मेरे साथ एक मेरी पार्टनर भी थी वह भी मेरी अच्छी सहेली थी। हमारा काम बहुत अच्छा चल रहा था। लेकिन जब भी मैं दुकान का कपड़ा लेने जाती तो अकेली जाती, वह मेरे साथ नहीं जाती थी। जब गाड़ी पर जाना होता था तो तब  चल पड़ती, लेकिन जब बस पर जाना होता था। तो तब मना कर देती, लेकिन मैं कभी उसको कुछ नहीं कहती चुपचाप खुद चली जाती! जब वहां पर लेट हो जाती तो घर पर डांट पड़ती मेरा पति भी मुझे यह कहता के तेरी दुकान से ज्यादा घर  जरूरी है। लेकिन मैं फिर भी बड़ी आसानी से सब कुछ संभाल लेती।
 

एक दिन मेरी पार्टनर ने मुझे बोला कि 

मैं अब दुकान नहीं करूंगी यह सुनकर मुझे बहुत झटका लगा क्योंकि जब वह दुकान पर बैठती थी तो मैं अपने घर का काम कर लेती थी और जब मैं बैठती थी तो वह कर लेती थी मुझे ऐसा लगा कि मैं अकेली कैसे करूंगी मैं यह सोच रही थी कि जब घर जाऊंगी खाना बनाने तो दुकान बंद करके जानी पड़ेगी और कोई कस्टमर आएगा तो वह दुकान बंद देखकर वापस चला जाएगा मैं कई दिनों तक अब तो ऐसा करती रही।

घर और दुकान दोनों को संभालती रही बड़ी मुश्किल से, कई दिन निकल जाने के बाद मेरी फ्रेंड सुमन मेरे पास दुकान पर आई उसने मुझे कहा अगर तू दुकान आ बेचना चाहती है तो मुझे दे दे जितना भी तेरा सामान है मैं तुझे पैसे दे दूंगी उसने बोला मैं तुझे 15 दिनों के अंदर पैसे दे दूंगी मैंने बोला ठीक है उसने बोला मैं तुझे ₹50000 दुकान का दे दूंगी लेकिन जुबान करने के बाद वे मुकर गई उसने बोला मैं तुझे 50 नहीं अब 30 दूंगी मैंने बोला चलो कोई बात नहीं ठीक है जैसी तेरी मर्जी।
 

3 महीने बीत जाने के बाद

मैंने उससे जब भी पैसे मांगे तो वह यही बोलती के  दे दूंगी। मैं कहीं भागी जा रही हूं, तेरे पैसे लेकर और आगे से लड़ने लग जाती! लेकिन मैं हमेशा प्यार से बात करती उससे, क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि हमारी दोस्ती में कोई दरार आए, मेरा पति भी मुझे बहुत डांट लगाता। कितना टाइम हो चुका तुमने दुकान सेल की है अभी तक पैसे क्यों नहीं  लेकर  आती वह अपनी जगह पर सही था क्योंकि उसने मुझे ₹200000 दुकान करने के लिए दिए थे, लेकिन मेरी बहुत ज्यादा उदार होने के कारण पैसा डूब चुका था।

वह मेरी इतनी अच्छी दोस्त होते हुए भी मुझे समझ नहीं पाई, 1 साल हो गया अब तक उसने मुझे एक भी पैसा नहीं दिया मुझे सिर्फ धोखा मिला उससे, मैं अब अंदर से इतना टूट चुकी हूं कि जिंदगी में कोई भी सहेली नहीं बनाऊंगी दोस्ती पर से मेरा विश्वास उठ चुका है। उसने मेरे साथ बात करना भी छोड़ दिया और अब मेरा फोन उठाना भी छोड़ दिया मैंने तो हमेशा उसका अच्छा चाहा! मुझे यह दुख नहीं कि उसने मेरे पैसे नहीं दिये, दुख इस बात का है कि उसने मेरी दोस्ती तोड़ दी और हमेशा के लिए मुझसे दूर हो गयी।
 

निष्कर्ष:

आज की कहानी आपको कैसा लगी ये मेरी सच्ची कहानी है, अगर आपको अच्छी लगे तो नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट जरूर करो प्लीज और अपने दोस्तों तक साझा जरुर करें।



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