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वो राहें कहानी हिंदी में | That journey story in Hindi

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That journey story in Hindi

 

वो राहें कहानी हिंदी में

कुछ रास्ते ऐसे होते हैं, जिन्हें हम कभी नहीं भूल सकते क्योंकि वहां पर हम खेल कर बड़े होते हैं और अपने भाई बहनों के साथ मजा करते हैं, यह कहानी मेरे पति की सच्ची कहानी है मैंने इसमें कुछ भी अपनी तरफ से नहीं मिलाया हमारा पूरा परिवार 2 साल पहले गांव में रहता था। हम सभी खेतों में रहते थे और मेरे पति के चाचा का घर भी हमारे पास था। हम लोगों का आपस में बहुत प्यार था मेरे पति के दो चाचा के बेटे थे। एक बेटा बाहर रहता था एक जहां पर।

मेरा पति तो अपने चाचा के घर को हमेशा अपना समझता था। लेकिन उसकी चाची और उसका बेटा एक अलग ही सवभाव के थे। एक बार की बात है! मेरे पति का चाचा उसको अपने साथ दवाई लेने के लिए ले गया। जब वापस आए तो मेरे पति की चाची बोली तुम ही इसको हमेशा अपने साथ लेकर जाना आगे से हमारा तो कोई संबंध नहीं इससे, और जब मेरा पति यह सुनके अपने घर की तरफ आने लगा तो पीछे से उसने फिर यह आवाज लगाई, हमारे घर के मामलों में मत पड़ो और भी बहुत सारी बातें थी। 

जिनके कारण वह मेरे पति के साथ लड़ाई झगड़ा करते छोटी-छोटी बातों को लेकर, मेरा पति उनकी हमेशा सुनता रहता और कभी आगे से जवाब नहीं देता एक बार मेरे पति ने कहा," हम जहां पर नहीं रहेंगे मेरा तो दम घुटता है हम शहर में रहेंगे फिर मेरे पति ने हमारी जमीन और मकान बेच दिया 15 दिन के अंदर हम शहर में शिफ्ट हो गए।

शहर जाने के 3 दिन बाद

मेरे पति के चाचा के बेटे का फोन आया और उसने कहा" तुम्हारे घर के आगे जो रास्ता है वह हमारे नाम पर है और ताऊ ने हमें बेच दिया था। मेरे पति यह बात सुनकर कर बोले कि वह रास्ता हमेशा सांझा रास्ता रहा है। हम सभी का है और बाकी बात यह है कि कोई भी आदमी अपने घर के आगे वाला रास्ता कभी नहीं बेच सकता।

मेरा ससुर तो उस वक्त नहीं था अगर होता तो जरूर बताता!तो क्या हुआ हमें नहीं पता था उन लोगों ने क्या किया क्या नहीं किया अब जिन लोगों ने हमारा घर खरीदा था उनको घर में जाने के लिए रास्ते की जरूरत थी हमने बयाना लिया था।

अभी रजिस्ट्री करवानी थी इसके बाद मेरे पति ने पंचायत की लेकिन वह लोग माने नहीं उन्होंने कहा 700000 लेंगे फिर रास्ता छोड़ देंगे गांव में यह रकम बहुत ज्यादा थी। इतना रेट नहीं था लेकिन उनका मकसद मेरे पति को परेशान करना था इसके बाद हमने पैसे दे दिए और उन्होंने रास्ता छोड़ दिया। मेरा पति अब इतना परेशान रहता कि किसी से बात तक नहीं करता अच्छी तरह, और बहुत कमजोर सा हो चुका है सभी बोलते हैं कि तू पहले वाला नहीं रहा। मन ही मन में उसको गम खाये जा रहा है वह यह सोचता रहता है के अगर मेरे चाचा होते तो ऐसा नहीं करते।

मुझे भी समझ नहीं आता क्यों औरतें एक ही घर को तोड़ कर दो कर देती हैं अगर मां अच्छी शिक्षा दे तो बच्चा कभी भी बुरा नहीं करता किसी का और ना ही कभी अपनों से लड़ाई करता है कभी-कभी मेरे पति को अपने आप से बातें करता देखती हूं वह समय कितना सुंदर था! जब मैं और चाचा का बेटा साथ खेलते थे। एक जगह पर खाते थे लेकिन आज कहां वो और कहां हम।
 

निष्कर्ष

दोस्तो मैं आशा करती हूं मेरी कहानी आपको जरूर अच्छी लगेगी क्योंकि परिवार हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है आप सब जानते हो आप मेरी कहानी भी पढ़ते हो लेकिन कमेंट बिल्कुल नहीं करते मेरा हौसला बढ़ाने के लिए प्लीज मुझे कमेंट जरूर करें।


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