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गाँव और शहरी जीवन में अंतर | Difference between village and urban life in hindi

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 gaanv aur shaharee jeevan mein antar

                   
गांव और शहरी जीवन में अंतर
 
हमारे देश की अधिकतम संख्या गांवों में रहती है कुछ लोग शहरों में रहना पसंद करते हैं.लेकिन कुछ लोग गांवों में रहना  पसंद करते हैं.एक तरह से देखा जाए तो गांव का वातावरण  हमारी सेहत के लिए बहुत ही अच्छा साबित होता है।

और प्रदूषण रहित होता है.कई मामले में शहर अच्छा होता है और कई मामलों में गांव  अच्छा होता है जैसी जिंदगी हम गांव में बतीत करते हैं, ठीक वैसी ही जिंदगी हम शहर में बतीत  करते हैं, जैसे हम शहर  में खाते पीते हैं.वैसे ही हम गांव में खाते पीते हैं.लेकिन कई ऐसे कारण हैं जिनके कारण हमें गांव में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

गांव में अच्छे टीचर ना मिलने की वजह से बच्चों की स्टडी पर बुरा प्रभाव पड़ता है और उनको शहर में स्टडी के लिए जाना पड़ता है ट्यूशन के लिए जाना पड़ता है.इसलिए आजकल जो लोग गांवों में रह रहे हैं, वह शहर में शिफ्ट हो रहे हैं। अपने अच्छे भविष्य के लिए अपने बच्चों के अच्छे भविष्य के लिए।

शहर में ज्यादा प्रदूषण तो होता है लेकिन हमारी जिंदगी की जो रफ्तार है वह शहर में रहकर ही आगे बढ़ सकती है.और हम अच्छे शहर में रहकर अच्छी स्टडी करके आगे बढ़ सकते हैं.गांव में यह सब कभी नहीं हो सकता कई लोग ऐसे होते हैं जो गांव के खुले वातावरण में रहना पसंद करते हैं.जैसे हमारे बड़े बुजुर्ग उनको गांव में रहना ही अच्छा लगता है।

शहर में वह यह कहते हैं कि उनका दम घुटता है, लेकिन बच्चों की मर्जी के कारण उन्हें भी शहर में शिफ्ट होना पड़ता है, सिर्फ अपने बच्चों और परिवार के लिए हमारे जो गांव होते हैं वहां हमें खुली हवा तो मिलती है लेकिन साथ ही साथ हम ताजा सब्जियों को उगाते  हैं और ताजा फल और सब्जियां खाते हैं. जो हमारी सेहत के लिए बहुत अच्छे रहते हैं और हम  बीमारियों से हमेशा बचे रहते हैं।

लेकिन शहर में हमें कई दिनों की पुरानी सब्जियां खरीद कर खानी पड़ती हैं, फल फ्रूट खाने पड़ते हैं.हमें अक्सर यह बोला जाता कि सब्ज़िया ताजा हैं, लेकिन जब हम घर में आकर उनको 1 दिन के लिए भी रख देते हैं तो वह खराब हो जाती हैं, एक तरह से देखा जाए तो गांव हमारे स्वास्थ्य के लिए तो अच्छा है लेकिन हमारे बच्चे शहर में रहकर ही एक अच्छी नौकरी पा सकते हैं अपने जीवन में तरक्की कर सकते हैं और बड़े आदमी बन सकते हैं।

गाँव का जीवन
 
गाँव और शहरी जीवन में अंतर
 
गांव का जीवन सीधा और सादा होता है.और वहां भीड़ भड़का नहीं होता। गांवों में लोगों का ज्यादा समय या तो अपने खेतों में  बीतता है या अपने घरों में, खाली समय में लोग गांव के बीच में बने दरख्तों के नीचे बैठ कर अपना समय बिताते हैं। लेकिन दिक्कत गांव में यह होती है के जहां पर अच्छे डॉक्टर नहीं मिल पाते, जिनकी वजह से लोगों की मृत्यु हो जाती है और उनका अच्छी तरह से इलाज नहीं हो पाता। गांंव में शहर के मुकाबले इतनी चहल-पहल और रौनक नहीं होती और ना ही शहर की तरह इतनी गाड़ियां देखने को मिलती हैं।

शहर का जीवन

 
गाँव और शहरी जीवन में अंतर
 
शहर में हमें बड़ी-बड़ी सड़कें और बड़ी-बड़ी इमारतें और शॉपिंग मॉल सिनेमा घर देखने को मिलते हैं.लेकिन गांव में यह सब कभी नहीं होता, अगर हमें कोई अच्छा कपड़ा खरीदना होता है या कोई खाने की वस्तु खरीदनी होती है तो हमें शहर से ही खरीद कर लाना पड़ता है।
 

उपसंहार

शहर में हमेशा चहल पहल रहती है वहां लोग देर रात तक जागते रहते हैं। अपना काम करते हैं बिजनेस करते हैं या कुछ स्टडी करते हैं, यहां के लोग रात को घूमना  ज्यादा पसंद करते हैं.लेकिन शहर में दिक्कत यह है कि जहां पर ज्यादा ट्रैफिक होने की वजह से जहां की हवा और पानी दूषित हो जाता है.जिसकी वजह से  हम शुद्ध हवा और पानी से वंचित रह जाते हैं। 
 
इस तरह से दोस्तों गांव और शहरी जीवन में बहुत अंतर है लेकिन हम अपनी जरूरतों के हिसाब से वह जगह चुनते हैं जो हमारे लिए सही है चाहे शहर हो चाहे गांव, इस तरह से अगर आपने मेरा यह निबंध गांव और शहरी जीवन में अंतर अच्छा लगा तो बताइएगा जरूर आपकी प्यारी लेखिका परविंदर 

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2 Comments
  1. गाँव के लोग सुबह जल्दी उठते हैं, शहर के लोग 10 11 बजे तक भी सोते ही रहते हैं, ये भी एक फर्क गाँव में ओर शहर में !!!!!!

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