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एक अनंत प्यार की कहानी- मिर्जा और साहिबा Hindi Love Story Mirja Sahiba

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 एक अनंत प्यार की कहानी - मिर्जा और साहिबा Hindi Love Story Mirja Sahiba    


मिर्जा साहिबा की प्यार की कहानी, मिर्जा साहिबा, Hindi Love Story Mirja Sahiba


हेलो मेरे प्यारे दोस्तों मैं आशा करती हूं कि मैं जो भी कहानी या लेख लिखती हूं आपको वह जरूर पसंद आए होंगे इस कहानी से पहले मैंने एक लेख लिखा था पति को कैसे खुश करें और कैसे उनका दिल जीते आपने उसे भी बहुत प्यार दिया आज मैं फिर आपके सामने एक अनंत प्यार की कहानी लेकर आ रही हूं यह कहानी है मिर्जा और साहिबा की प्यार कहानी Hindi Love Story Mirja Aur Sahiba

मिर्जा साहिबा की प्यार की कहानी का इतिहास

Hindi love story Mirza Sahiba
Image credit :- Gurdishpannu

(Love Story) मिर्जा साहिबा के प्यार की कहानी बहुत पुरानी है। यह कहानी  इतिहास के हर पन्ने पर दर्ज है। यह अकसर माना जाता है कि उन दोनों के प्यार की घटना 1627 से लेकर 1658 के बीच घटी,उस वक्त उन दोनों ने ऐसा इश्क किया जो ना किसी ने किया और ना कोई कर सकता है। पुराने समय के प्यार और आजकल के प्यार में दिन रात का फर्क है। आजकल तो लोग प्यार करते हैं अपने मतलब के लिए या अपने किसी लालच के लिए, लेकिन मिर्जा साहिबा तो एक दूसरे को इतना चाहते थे कि वह एक दूसरे की खुशी के लिए कुछ भी कर सकते थे। पंजाब की धरती में एक साथ पले बढ़े मिर्जा और साहिबा की रग रग  में यह इश्क ऐसे बह रहा था कि इस इश्क ने एक दिन उन दोनों की जान ले ली,आइए आज हम बात करने जा रहे हैं मिर्जा और साहिबा की अनोखी प्यार की कहानी के बारे में, यह कहानी पढ़ने के बाद आपको पता चल जाएगा कि उन दोनों की अनोखी प्यार की कहानी आजकल के प्रेम मामलों से कितनी अलग है। 

मिर्जा साहिबा की प्यार की कहानी की शुरुआत Hindi Love Story


यह कहानी शुरू होती है पंजाब से और जहां से ही उनके प्यार की दास्तान शुरू होती है मिर्जा पाकिस्तान के पास एक गांव फैसलाबाद में पैदा हुआ। यह गांव ननकाना साहिब के पास पाकिस्तान में है। और उधर साहिबा खेवा नामक गांव में पैदा हुई। मिर्जा के और चार भाई बहन थे। मिर्जा बहुत ज्यादा शरारती था इस के कारण उसकी मां ने उसे उसके नानके गांव में भेज दिया। वहां मिर्जे को मसीत में पढ़ने के लिए भेजा गया। और वहां पर उसे साहिबा मिली, और यहीं से उनकी प्यार कहानी शुरू हो गई

मिर्जा को साहिबा से प्यार Hindi Love Story


साहिबा इतनी सुंदर थी के उसको देखते ही हर कोई इंसान अपना काम वहीं पर छोड़ देता था। बस उसे देखता ही रह जाता। साहिबा और मिर्जा  एक साथ पढ़ने लगे, साहिबा घर से पड़ने के लिए जाती और वहां मिरजे के साथ प्यार के झूलों में झूलती, कभी कबार एक दूसरे के लिए उन दोनों को काजी से मार भी पड़ती, लेकिन वह एक दूसरे के इश्क में अंधे हो चुके थे। पहले तो एक-दूसरे के सच्चे दोस्त थे। 

धीरे-धीरे उनकी दोस्ती इश्क में बदल गई। उनको कुछ  पता ही नहीं चला, चोरी छुपे प्यार करते करते मिर्जा और साहिबा एक दिन मशहूर हो गए, हर गली और मोहल्ले में उनके प्यार के चर्चे होने लगे, लेकिन जब साहिबा के घरवालों को मिर्जा और साहिबा के प्यार का पता चला तो उन्होंने मिर्जा को वापस उसके गांव में भेज दिया। लेकिन साहिबा मिरजे के प्यार में रोती विलकती रही। आखिर दिल पर पथर रख कर और समाज के कड़े नियमों के कारण साहिबा को सबर करना पड़ा

इस के बीच ही उसकी शादी कहीं और तय कर दी गई। जब शादी का दिन आया तो साहिबा ने कर्मु ब्राह्मण के हाथ मिर्जा को यह संदेश भेजा कि वह अपनी साहिबा को आकर ले जाए, यह सुनते ही मिर्जा साहिबा को लेकर आने के लिए तयार हो गया। लेकिन उधर मिर्जा की बहन का भी उसी दिन विवाह था। उसने बहुत कोशिश की मिरजे को रोकने की, लेकिन मिरजे ने कहा मुझे जाने दो मैं बहुत जल्दी लौट कर आऊंगा और तुम्हारी शादी की रस्में अपने हाथ से पूरी करूंगा।

 मिरजे की मां और बाप ने उसे बहुत समझाया रोकना चाहा,लेकिन साहिबा के इश्क में अंधे मिरजे ने उनकी एक नहीं मानी, उसकी भाभी ने भी उसे कहा कि मैं तुझे बहुत सुंदर सा रिश्ता करवाऊंगी। लेकिन फिर भी मिर्जा  साहिबा को लेने के लिए अपने घोड़े के ऊपर बैठ कर निकल पड़ा। जब मिर्जा साहिबा के घर पर पहुंचता है तो वह साहिबा को अपने साथ घोड़ी पर बिठा कर ले जाता है। 

साहिबा के घरवाले उसे देखते ही रह जाते हैं। इस के बाद साहिबा के भाई उसके होने वाले पति के साथ मिलकर उन दोनों का पीछा करते हैं। मिर्जा तीरंदाजी में सबसे आगे था। रास्ते में उसको एक पुराना दुश्मन मिल जाता है उसे मिर्जा मार देता है। साहिबा बहुत घबरा जाती है ये खून खराबा देख के,उसे यह था के कहीं मिर्जा उसके भाईयो को ना मार डाले,इस के बाद मिर्जा आराम करने के लिए एक वृक्ष के नीचे लेट गया। 

मिर्जा साहिबा की प्यार की कहानी का दुखदायक अंत

साहिबा भी उसके साथ बैठ गई। उसने डर के मारे मिरजे को वापिस उसके गांव में जाने के लिए कहा,लेकिन मिरजे ने कहा मेरा मुकाबला कोई भी नहीं कर सकता मैं तुम्हारे भाइयों को मार डालूंगा। थका हारा मिर्जा साहिबा की गोद में लेट जाता है इसके बाद उसको नींद आ जाती है और साहिबा का ध्यान उसके भाइयों की घोड़ियों की तरफ पड़ता है। उसने यह सोचा कि मिर्जा तीरंदाजी में बहुत मजबूत है। और मेरे  भाइयों को मार डालेगा 

उसने उस वक्त उसका तीर का तोड़ डाला, और उसकी कमान को ऊपर दरख़्त पर लटका दिया,इसके बाद उसने यह सोचा था कि वह अपने भाइयों को मना लेगी।  लेकिन अनहोनी कुछ और ही थी। उस वक्त साहिबा के भाइयों ने मिरजे पर आकर हमला कर दिया।और उसे जान से मार दिया, इसके बाद चिलाते हुए मिरजे ने साहिबा को कहा तुमने मेरे साथ अच्छा नहीं किया। 

अगर तुम मेरा तीर नहीं तोड़ती तो मैं पहला तीर तेरे भाई समीर  की छाती में और दूसरा उसके घोड़े  और तीसरा तेरे मंगेतर की छाती में मारता। और हमेशा के लिए जीत जाता। यह सुनते साहिबा ने मिरजे को यह कहा के मौत को कोई नहीं रोक सकता यह तो बड़े बड़े गुरु पीरों पर भी आती है। साहिबा ने अपनी बाहों में पड़े मिरजे को कहा मुझे भी साथ ले चल, मैं अब जीना नहीं चाहती। 

इसके बाद साहिबा ने किरपान के साथ अपनी जान दे दी,इस तरह से यह Hindi Love Story Mirja Aur Sahiba, लिखने पर भी बहुत दुख होता है। और पड़ने पर भी,एक तरह से देखा जाए तो साहिबा ने मिरजे के साथ दोखा किया,लेकिन भगवान जो लिखता है ठीक वैसे ही होता है। उन के प्यार का अंत ऐसे ही होना था। बहुत सारे पंजाबी गानों और हिंदी गानों में मिर्जा साहिबा का जिक्र किया गया है। बहुत सारी फिल्में भी बनाई गई है। मिर्जा साहिबा की प्रेम कहानी पर जो भी फिल्में बनी उन्हें दर्शकों की ओर से पूरा सराहा

कृपया मुझे यह बताएं कि यह कहानी पढ़कर आपको कैसा लगा नीचे कमेंट बॉक्स में अपने विचार जरूर साझा करें.





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