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नारी शिक्षा में महान औरतों का हाथ | Essay On Woman Education in hindi

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Essay On Woman Education in hindi
 

नारी शिक्षा में महान औरतों का हाथ 

Hi hindilook.in के पाठकों मेरे ब्लॉग पर आने के लिए आपका स्वागत है। आज का मेरा यह लेख है नारी शिक्षा को आगे बढाने वाली महत्वपर्ण औरतों पर (Essay On women Education) जिन्होने मेहनत करके दुनिया में प्रसिद्धि प्राप्त की आज के युग की जो नारी है। वह पुरुषों के समान आर्मी नेवी से लेकर एमबीए फार्मेसी होटल मैनेजमेंट इंश्योरेंस एजेंट इंजीनियरिंग एकाएक सभी सीढ़ियों को पार करते हुए आसमान तक पहुंच चुकी है।

आज की सामाजिक परिस्थिति बदल चुकी हैं। और यदि यह कहा जाए कि उन्हें बदलने वाली नारी है तो कोई गलत बात नहीं है। इस बदलाव की शुरुआत करने वाली हमारे देश की महान महलाए हैं। चाहे जहाज उड़ाना हो या ड्राइविंग बॉक्सिंग हो जा स्पेन में जाने की बात हो जो सोचा वही कर डाला नारी के इस रूप को हर पुरुष परे खड़ा देखता ही रह जाता है।

आइए जाने उन महिलाओं के बारे में जिन्होंने लड़कियों की शिक्षा के लिए काम किया और शिक्षा के क्षेत्र में एक अच्छी क्रांति की लहर को दौड़ाया -

सावित्रीबाई फुले


सावित्रीबाई फुले को भारत की प्रथम महिला शिक्षिका के तौर पर जाना जाता है। जिन्होंने महिला शिक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने पुणे में 1848 में अपने पति ज्योतिराव फुले से मिलकर एक बालिका विद्यालय की स्थापना की थी। और खुद एक शिक्षिका भी बनी सावित्रीबाई फुले के पति और उन्होंने मिलकर बहुत सारे सराहनीय कार्य किए 

और आगे बढ़ कर समाज सुधारक के तौर पर काम किया उन्होंने लड़कियों कि शिक्षा पर पूरा जोर दिया और उनके हक के लिए लड़ाई भी की, सावित्रीबाई ने बहुत सारे स्कूल खोले और कमजोर जातियों को पढ़ाना शुरू कियाउन्हें दलित जातियों के लोगों द्वारा बहुत तंग किया जाता था जब वह स्कूल में लड़कियों को पढ़ाने जाती थी उन पर गोबर पत्थर गली सड़ी सब्जियों भी फेंकी गई लेकिन फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और लड़कियों को पढ़ाने का काम नहीं छोड़ा।

मारिया मोंटेसरी


मारिया मोंटेसरी एक ऐसी महिला थी।जिन्होंने नर्सरी स्कूल की स्थापना की उनका जन्म 1870 में इटली में हुआ उन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा को प्रदान कर दिया रोम में उन्होंने नई शिक्षा पद्धति का निर्माण किया दुनियाभर में जितने भी स्कूल हैं वह सभी उनके निर्देशों का अभी भी पालन करते हैं।


कादंबिनी गांगुली


कादंबिनी गांगुली भारत की एक ऐसी महिला थी जो देश की पहली महिला चिकित्सक थी। और उन्होंने कोयला खदानों में काम करने वाली महिलाओं की स्थिति को सुधारने के लिए भी काफी काम किया था।

दुर्गाबाई देशमुख


वह गायक स्वतंत्रता सेनानी थी। जिन्होंने महात्मा गांधी के आदर्शों पर चलते हुए स्कूलों की स्थापना की और उनमें महिलाओं को चरखा चलाने और काटने की ट्रेनिंग दी आजादी के संघर्ष में लिप्त होने के बावजूद दुर्गाबाई ने अपनी पढ़ाई के लिए वक्त निकाला और बीए व एमए की डिग्री हासिल की बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी की मैट्रिक परीक्षा के लिए उन्होंने आंध्र महिला सभा की स्थापना भी की जहां लड़कियों को उससे परीक्षा की ट्रेनिंग दी जा सके।


सुगरा हुमायूं मिर्जा


उन्होंने महिला अधिकारों को अपनी आवाज दी व समाज सुधारक थी। और कई महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचने वाली पहली महिला बनी उन्हें हैदराबाद दक्कन की पहली महिला संपादक माना जाता है। उन्होंने क्षत्रियों के लिए पत्रिका निकाली और आनंद निशा और जेबुन्निसा पत्रिकाओं का संपादन किया उन्होंने पर्दे में कैद जिंदगी से खुद को आजाद किया घर से बाहर बिना पर्दे के निकलने वाली वह हैदराबाद दकन इलाके की पहली महिला मानी जाती है। सन 1934 में उन्होंने हैदराबाद में लड़कियों के लिए मदरसा दरिया शुरू किया जो आज भी सफदरिया गर्ल हाई स्कूल के नाम से चल रहा है।


महादेवी वर्मा


महादेवी वर्मा हिंदी भाषा की महान कवित्री सेनानी और शिक्षक थी। उनकी शुरुआती शिक्षा इंदौर में हुई उन्होंने 7 वर्ष की आयु से ही कविताएं लिखना शुरू कर दिया था। उनकी गिनती हिंदी कविता के छायावादी युग के चार प्रमुख हस्तियों सुमित्रानंदन पंत, जयशंकर प्रसाद और सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के साथ की जाती है। इलाहाबाद के प्रयाग महिला विद्यापीठ में उन्होंने बतौर प्रिंसिपल और वाइस चांसलर के तौर पर काम किया।

एमा विलार्ड


एम्मा एक अंग्रेज किसान परिवार की बेटी थी। इसी पृष्ठभूमि से होने और वह भी 18 वी सदी की वजह से अम्मा के पास शिक्षा की दुनिया में बहुत बड़ा बदलाव लाने के लिए संसाधन नहीं थे। परंतु उसने ऐसा कर दिखाया केवल अभी 20 वर्ष की आयु में वह एक शिक्षिका ही नहीं वर्मेत एकेडमी की प्रमुख भी बढ़ गई उन्होंने महिला शिक्षा में सुधार के लिए एक प्रस्ताव रखा जिसे तत्कालीन प्रबंध और आम जनता द्वारा खूब सराहा गया।


कलारा बार्टन


औपचारिक शिक्षा किसी भी व्यक्ति को दुनिया को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकती है।लेकिन ऐसी स्थिति में जब दुनिया खतरे में हो तो कौशल काम आते हैं क्लारा बांटन वह महिला है। जिन्होंने अमेरिकन रेडक्रास की स्थापना उस समय की जब महिलाओं को घर के बाहर काम करते हुए शायद ही देखा जाता था।खुद एक नर्स होने के नाते उन्होंने बुनियादी चिकित्सा ज्ञान और नर्सिंग की भावना समझने तथा आत्मसात करने की आवश्यकता के बारे में एक पूरी पीढ़ी का मार्गदर्शन किया।

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